सभी समस्याओं का मूलकारण ब्राह्मणवाद3

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Thu, 10 Dec, 2026 at 01:30 pm

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Location

Uday Ganj | Lucknow, UP

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मूलनिवासी छात्र उच्च शिक्षा में असफल
आपने देखा होगा कि हमारे लोग ज्यादातर गाँवो में रहते हैं यहाँ एक तो स्कूल नहीं है और है भी तो वहाँ के स्कूलों की दयनीय स्थिति है। अनेक स्कूलों में चौथी कक्षा तक एक ही एक ही शिक्षक सभी विद्यार्थियों को सभी विषय पढ़ाता है। शहरों में या ब्राह्मणों के स्कूलों में देखा जाए तो एक स्कूल में एक कक्षा के एक विषय के लिए एक शिक्षक होता है।
गाँवो में हमारे बचे जहीं पढ़ते हैं वहां सरकारी स्कूल होते हैं और सरकार (शासन-प्रशासन) तो ब्राह्मण के हाथी में है, वे हमारी शिक्षा पर ध्यान ही नहीं देना चाहते। गाँव में एक शिक्षक पहली से चौथी तक की कक्षा को सभी विषय पढ़ाता है।
इससे वह साल भर में कितने विद्यार्थियों पर ध्यान दे पाएगा? अगर वह शिक्षक ध्यान नहीं दे पाएगा तो क्या शहर के स्कूलों के विद्यार्थियों के साथ गाँव के विद्यार्थी को उतनी जानकारी ही नहीं दी जाती जितनी कि शहर के विद्यार्थी को दी जाती है।
परिणामतः हमारे बचे हर क्षेत्र में पिछड़ जाते हैं। जब चौथी कक्षा के बाद पाँचवीं से दसवीं तक का सफर हमारे बचे तय करते हैं तो वे आगे की पढ़ाई करते बक्त कठिनाईयों महसूस करते हैं।
उनकी समझ में कुछ नहीं आता और साथ-साथ वे अग्रेजी भाषा का ज्ञान भी प्राप्त नहीं कर सकते, परिणामतः वे दसवीं के पहले ही फेल होने की स्थिति से ग्रस्त हो जाते हैं।
दसवीं और उसके आगे की पढ़ाई उनके लिए एक बहुत बड़े संकट के तौर पर सामने होती है और वे फेल होते हैं। इससे यह साबित होता है कि हमारे बचे दसवी तक पहुँच ही नहीं पाते और फेल हो जाते हैं। इसी प्रकार जैसे-जैसे उच कक्षाओं में जाते हैं उनके असफल होने का अनुपात बढ़ता जाता है। इसके लिए भी ब्राह्मणवाद ही जिम्मेवार है।
सभी समस्याओं का मूल कारण ब्राह्मणवाद
सांप्रदायिक दंगे-फैसाद
हमारे देश में किसी भी जगह आये दिन साम्प्रदायिक दंगा होते रहता है। इसमें धर्म परिवतील अल्पसंख्यक समुदाय के मूलनिवासी बहुजन समाज के लोग मारे जाते हैं या उनकी सम्पत्ति को क्षति पहुंचती है। इनको पुनः स्थापित करने के लिए सरकार के पास आर्थिक और अन्य संसाधनों की कमी हो जाती है या मूलनिवासियों तक पहुँचते-पहुँचते खत्म हो जाती है या ब्राह्मणों द्वारा उसे पहुँचने ही नहीं दिया जाता है।
स्वर्ण मंदिर में 'आपरेशन ब्लू स्टार' (Opretion Blue Star) हुआ जिसमें स्वर्ण मंदिर में सेना (Military) घुसाई गई यह षड़यंत्र अल्पसंख्यक ब्राह्मणों को बहुसंख्यक बनाने के लिए किया गया था।
3 फिसदी ब्राह्मण अपने बूते (जाति के आधार) पर चुनाव जीत नहीं सकते अगर सिखों के धार्मिक मंदिरों पर आक्रमण होगा तो उसकी हिन्दुओं पर धार्मिक प्रतिक्रिया होगी और धर्म के आधार पर ब्राह्मणों को वोट ज्यादा मिलेगा। आपरेशन ब्लू स्टार के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद जिस प्रकार से सिखों का ब्राह्मणों ने नरसंहार किया तथा देश में उनकी सम्पति को जलाया, यह सब कुछ ब्राह्मणवादी षड़यंत्र के अंतर्गत था। उसके बाद राजीव गांधी के नेतृत्व में काँग्रेस ने चुनाव लड़ा और 413 सांसद चुन कर आये जो कि अब तक के कांग्रेस पार्टी के इतिहास में रिकार्ड रहा है। यह रिकार्ड राजीव गांधी के नाना जवाहर लाल नेहरु का भी नहीं था जो कि तथाकथित आजादी के आन्दोलन का तपातपाया नेता था।
उसकी अपेक्षा राजीव गांधी तो मामूली पायलट था, उसे राजनीति में आये मात्र 2 साल हुए थे। जिसका देशहित में कोई योगदान भी नहीं हुआ था। कितनी विरोधाभासी स्थिति है कि एक वह व्यक्ति जो एक मामूलीसा पायलट हो यह 413 सांसद जीता सकता है लेकिन एक वो जिसका गोरे अंग्रेजों को भगाने में बहुत योगदान था वह कभी 367 से अधिक सांसदों को न जीता सका। यह
सम्भव कैसे हुआ? यह अल्पसंख्यक लोगों को बहुसंख्यक बनाने के लिए गैर ब्राह्मण
धर्मस्थलों और उनके प्रतिकों पर हमला करके सम्भव हुआ। अर्थात जब अनुसूचित जाति, जनजाति और ओ बी. सी. पर धार्मिक प्रतिक्रिया हो जाती है तो वे लोग धर्म के नाम पर ब्राह्मणी का समर्थन करते हैं। इसी कारण से ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार हुआ। बाबरी मस्जिद गिराई गयी।
धर्मांतरण के नाम पर इसीलिए क्रिश्चनों पर हमले हो रहे हैं। ब्राह्मणवादी लोग सत्ता में बने रहने के लिए अनेक प्रकार की धार्मिक प्रतिक्रिया करा रहे हैं जिससे ब्राह्मणवादी लोग हर हालत में मूलनिवासी बहुजनों पर अपना वर्चस्व बरकरार रखे हुए हैं। इससे यह बात स्पष्ट रुप से समझ में आती है कि दंगों से फायदा ब्राह्मणों को ही होता है। अतः देश में साम्प्रदायिक दंगों का मूल कारण ब्राह्मणवाद ही है।
जातिय हिंसाचार
मूलनिवासी बहुजनों की जनसंख्या 85% प्रतिशत है। लेकिन जन और समाज होते हुए भी ब्राह्मणवादी लोग दूर बैठे-बैठें ही हमारे मन-मस्तिष्क को नियंत्रित करते रहते हैं। ब्राह्मण बनिया प्रचार माध्यम में 'ब्राह्मण' संपादक की कुर्सी पर बैठे-बैठें ही कलम के द्वारा हमारे लोगों को ब्राह्मणों के हितों में जनमत बनाने के लिए तैयार करते हैं।
ब्राह्मण लोग मूलनिवासी बहुजनों को जब चाहे सड़क पर लाते हैं। वे बाबा साहब डा. अम्बेडकर की मूर्ति का चश्मा तोड़ते हैं और वे ही इसका प्रचार करते हैं। लोगों की भावनाओं को भड़काया जाता है और जब लोग भड़क जाते हैं और विरोध में खड़े हो जाते है तो ब्राह्मण ही गोली चलवाकर हमारे 10-12 मूलनिवासी बहुजनों को मार कर घर में बैठ जाते हैं। यह सब ब्राहाण-बनिया प्रचार माध्यम के द्वारा तैयार जनमत से करता है। इससे जातियां आपस में लड़ती रहती है और ब्राह्मणवाद इन जातियों के उपर राज करता है। इस तरह से इन जातिय हिंसाचार एवं दंगों का मूल कारण भी ब्राह्मणवाद है।
जनसंख्या वृध्दि
आश्चर्यजनक अवश्य लगता है मगर वास्तविकता यही है कि देश की जनसंख्या वृध्दि का भी मूल कारण ब्राह्मणवाद ही है। लोग सोचेंगे कि इस समस्या के पीछे किस प्रकार से ब्राह्मणबाद जिम्मेदार है? अल्पसंख्यक ब्राह्मणों को जनतंत्र में सत्ता में आने के लिए गुलामों की आवश्यकता है। मूलनिवासी बहुजनों का परिवार अगर बड़ा हो गया तो जो नई समस्याएँ निर्माण होगी ये समस्याएँ ब्राह्मणों की समस्याएँ नहीं हैं। इसलिए सत्ता में होने के बावजूद भी जनसंख्या नियंत्रण का कोई कार्यक्रम नहीं बनाते। बहुसंख्य मूलनिवासी बहुजनों को गुलाम बनाने तथा उन्हें आर्थिक तंगी से घिरे रखने के लिए वे जनसंख्या को बढ़ाने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रयास करते रहते हैं। शिक्षित परिवार को भी सलाह नहीं देते।
गाँवों में इसके बारे में कोई जनजागरण व शिक्षा नहीं देते। वे सोचते हैं कि यदि बहुजन समाज के परिवार बड़े होंगे तो अपनी ही समस्याओं के इर्द-गिर्द ही सीमित रहेंगे। परिणामतः उनकी आने वाली पीढ़ी शिक्षा से वंचित रहेगी। जब शिक्षा से वंचित होंगे तो उन पर आसानी से राज किया जा सकता है।
सरकार द्वारा देश के कानून बनाना और उस पर अमेल करना सरकार के हाथों में है। जनकल्याण का कोई भी कार्यक्रम बनाना और उस पर अमल करना भी सरकार के हाथों में है। मगर सरकार (शासन-प्रशासन) ब्राह्मणों के हाथों में है। इसलिए जनसंख्या वृध्दि का मूल कारण भी ब्राह्मणवाद है।
राजनैतिक भ्रष्टाचार
राजनीति में दिन-प्रतिदिन भ्रष्टाचार के फलने-फुलने का मूल कारण भ्रष्टाचार को ब्राह्मणवाद का संरक्षण प्राप्त होना है। चाहे वह 'बोफोर्स सौदा' हो या 'तहलका' या फिर 'हवाला' हो, सभी के मूल जड़ में ब्राह्मणवाद का ही साया है। इन सभी प्रकरणों से प्राप्त कालाधन किसी न किसी ब्राह्मणवादी पार्टी या व्यक्ति के खाते में जाते हुए सिध्द हुआ है, जिससे ये पार्टियाँ मूलनिवासियों के वोटों को लूट
कर या खरीद कर उनका शोषण कर सके। सभी भ्रष्टाचार के प्रकरणों में जितने भी ब्राह्मणवादी लोग कैसे है उन्हें बचाने के लिए तरह-तरह के हथकडो का इस्तेमाल किया जाता है। क्या यह उचित है कि ब्राह्मणवादियों के दृष्टिकोण से कुछ भ्रष्टाचारियों को छोड़ा जाए? ब्राह्मणवादियों की पार्टिया मूलनिवासी बहुजनों के वोटों को खरीदकर सत्ता में पहुँचती हैं इसके लिए उन्हें बड़े पैमाने पर पैसों की आवश्यकता होती है और पैसा उन्हें भ्रष्टाचार के माध्यम से ही मिलता है। अतः राजनैतिक भ्रष्टाचार का मूल कारण ब्राह्मणवाद ही है।
राजनीति का अपराधीकरण
राजनीति के अपराधीकरण का कारण भी ब्राह्मणवाद है। अपराधीकरण का सीधा संबंध मूलनिवासी बहुजनों को राजनैतिक गुलाम बनाने से है। 60 के दशक तक ब्राह्मणों ने सत्ता पर कब्जा जमाने के लिए मूलनिवासी बहुजनों की अज्ञानता का सहारा लिया लेकिन उसके बाद जैसे-जैसे मूलनिवासी बहुजन समाज में राजनीतिक जागृति आयी और अपने वोट की कीमत समझकर अपना स्वयं का जनाधार तैयार करने लगे लगे, ब्राह्मणवादी लोग मूलनिवासियों को डराने-धमकाने लगे।
मूलनिवासियों के वोट हथियाने के लिए उनको डराने तथा धमकाने के लिए ब्राह्मणवादियों के लिए भी गुंडों और माफियाओं की आवश्यकता महसूस हुई। इसलिए उनको निर्माण कर ब्राह्मणवादियों ने उनका उपयोग अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए गुंडो तथा माफियाओं का सहारा लिया और राजनीति का अपराधीकरण किया। इस तरह से 'राजनीति का अपराधीकरण' का भी मूल कारण ब्राहाणवाद है।
बाल मजदूरी
यह अधिकृत आँकडा है कि भारत में 6 करोड़ बाल मजदूर हैं। इनमें से
20 लाख से अधिक बचे खतरनाक उद्योगों में काम करते हैं। 50 लाख से अधिक बसे फुटपाथ पर जीवन बिताते हैं। इनमें से अघकितर नशा और यौन शोषण के शिकार हैं। अनेकों को जो जबरन अपराधिक कार्यों में लगाया जाता है। इन सबका मूल कारण ब्राह्मणवाद है। 6 करोड़ बाल मजदूर क्यों बने? क्योंकि उनके घर में खाने को अनाज नहीं है। वे बधे स्कूल में जा नहीं पाते।
भूख के कारण इनको भी काम करना पड़ता है। ये बच्चे अनूसूचित जाति, अनूसूचित जनजाति आरै पिछड़े वर्ग के होने के कारण उन पर हजारों सालों से ब्राह्मणवादियों ने अन्याय अत्याचार किये और आज भी कर रहे हैं। मूलनिवासियों को ब्राह्वाणों ने अधिकार वंचित किया और आजादी के बाद भी उनको कोई अधिकार नहीं दिया और न ही उनके उत्थान की तरफ कोई ध्यान दिया। इन बाल मजदूरों में ब्राह्मणवादियों के बचे नहीं है, अतः उनकी करुण व्यथा समझने व उनके उत्थान के लिए ब्राह्मणों के पास मानवीय दया भी नहीं है।
मूलनिवासी नारी अंधश्रध्दालू तथा अज्ञानी
बहुजन समाज की महिलाए अशिक्षित है, अज्ञानी हैं, अंधश्रध्दालु है ऐसा प्रचार बड़े पैमाने पर किया जाता है। मूलनिवासी बहुजन समाज की महिलाएं अज्ञानी, अशिक्षित, अंधश्रध्दालु है इसका मूल कारण ब्राह्मणवाद है। ब्राह्मणवादी धर्मशास्त्रों ने स्वी को किसी भी अधिकार के लिए योग्य नहीं माना। इतना ही नहीं स्त्री को सबसे ज्यादा
भय में रखने का काम इन तथाकथित धर्मशास्त्रों ने ही किया। इसके लिए उन्होंने कई प्रकार के त्योहारों का निर्माण किया। त्योहारों का पौरोहित्य करने वाले पुरोहित पर धर्मशास्त्रों ने यह जिम्मेदारी लगाई कि स्त्री को कर्मकांड में फैंसाओ तथा उनको न किये जाने पर अत्याधिक समस्याएं, संकट, कठिनाईयाँ भुगतनी पड़ेगी, इसका भय निर्माण करने का कार्य करो। धर्मशास्त्रों ने यह जिम्मेदारी लगायी और सभी ब्राह्मण पुरोहितों ने वह बड़े पैमाने पर निभायी तथा आज भी निभा रहे है। 'मनू' ने महिला को शिक्षा से वंचित किया। आधूनिक भारत में ब्राह्मणों ने अपनी महिलाओं को तो पढ़ाया मगर हमारे पुरुषों को भी शिक्षा न देने का अघोषित फैसला किया परिणामत हमारी महिलाओं की शिक्षित होने की बात तो बहुत दूर की है।
सतीप्रथा, बालविवाह
सती प्रथा और बाल विवाह को भारत का संविधान मान्यता नहीं देता मगर ब्राह्मणों के धर्मशास्त्र इसको मान्यता देते हैं। ब्राह्मणी धमशास्त्रों के निर्माता, संवर्धक, संरक्षक, प्रशंसक ब्राह्मण लोग इसके प्रचार-प्रचार में हरदम लगे रहते हैं। शासन-प्रशासन में वही लोग होने के कारण इसके विरुध्द कोई कार्रवाई ये नहीं करते। बल्कि इसे समर्थन देते हैं। सतीप्रथा को समर्थन देने वाली महारानी सिंधिया को काँग्रेस पार्टी टिकट देकर सांसद बनाती है तथा ऐसे लोगों को सम्मान देने के लिए प्रचार माध्यमों में होड लगती है।
अच्छी फसल न होना: कारण ब्राह्मणवाद
भारत में पीने के पानी की समस्या इतना विकराल रुप धारण कर चुकी है कि इसके मुकाबले खेती के लिए पानी की इच्छा रखना भी मुश्किल हो गया है। ब्राह्मणवादियों द्वारा बहुत सी ऐसी जमीनें मठों को दान दी गई है जहाँ अब फसल नहीं है। उन पर 96% ब्राहाण, बनिया, सामंतवादियों का कब्जा है। इसके अतिरिक्त जिनके पास भूमि है वह एक तो फसल के योग्य नहीं है या फिर उसके लिए पानी की कमी है। एक तरफ ब्राह्मणवादियों के फार्म हाऊस बन रहे हैं जिनमें पानी की कोई कमी नहीं है बल्कि इनके स्वीमिंग पूल का पानी कभी सूखता ही नहीं है।
सामाजिक वनीकरण के नाम पर ब्राह्मणवादियों ने पेड़-पौधे लगाकर जंगलों का निर्माण करने के नाम पर अरबों रुपया लुटाया मगर उसका परिणाम शुन्य आया। यह ब्राह्मणवादी प्रशासन द्वारा इस पर इमानदारी से अमल न करने
का नतीजा है। दूसरी तरफ अच्छी फसल के लिए जो अच्छे बीज चाहिए, वह खरीदने के लिए हमारे किसानों के पास पैसा नहीं है।
बीज खरीदने तक के लिए पैसा नहीं है तो रासायनिक खाद खरीदने के लिए पैसों की इच्छा करना बहुत दूर की बात है। यह सब ब्राह्मणवादी शासन-प्रशासन के धोखेबाजी का परिणाम है। अतः इस देश में अच्छी फसल नहीं होती इसका भी मूल कारण ब्राह्मणवाद ही है।
दस करोड़ से ज्यादा घुमंतू लोग
अनुमानित तौर पर यह आँकडा है कि 10 करोड़ लोग, जो मूलनिवासी है, सैकड़ों वर्षों से दर-दर की ठोकरें खाते हुए घूम रहे हैं। जिनके घर का पता नहीं, जिनका कोई राशन कार्ड नहीं, जिनका मतदाता सूची में नाम नहीं, जिनके पास भारत के नागरिक होने का भी कागजी प्रमाण नहीं, जिनके बचे स्कूलों में जा नहीं सकते, जिनको एक गाँव से दूसरे गाँव जाने की वजह से एक अपराधी की दृष्टि से देखा जाता है, ऐसे परिवार पत्थर तोडने जैसे काम करते हैं। जिनका कोई भविष्य निर्धारित नहीं है, अगर भविष्य है तो एक ही है वह गुलामी का। इन लोगों की समस्या भी ब्राह्मणवाद की देन है।
ब्राह्मणों ने पुष्पमित्र शृंग के नेतृत्व में जो प्रतिक्रांति की और इसका जिन्होंने विरोध किया उन मूलनिवासियों को ब्राह्मणवादियों ने दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर किया।
सरकार चाहती तो इन 10 करोड़ घुमंतू जातियों के दुःख-दर्द को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठा सकती थी। इनको भारत का नागरिकत्व का कोई दर्जा ही नहीं देना चाहती तो इनके राशन कार्ड बनने तो दूर। इनकी कोई गणना नहीं होती।
संविधान में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों के उत्थान के लिए प्रावधान होने के बावजूद भी सरकार इस पर कोई अमल नहीं करना चाहती क्योंकि सरकार आज तक ब्राह्मणवादियों के हाथों में ही है। अत 10 करोड़ घुमंतूजातियों की समस्याओं का मूल कारण भी ब्राह्मणवाद ही है।
मुखमरी की समस्या
देश में 20 करोड़ 85 लाख से ज्यादा लोग भुखमरी की कगार पर खडे है। उनको खाने के लिए अनाज नहीं है। इसलिए जंगल में उन्हें जो भी कुछ मिलता है, वे खाने के लिए मजबूर हैं। जंगल में उगी घास तथा तरह-तरह की गुठलियों खाने की वजह से इनकी मृत्यू हो रही है। इनको खाने को अनाज ही नहीं है तो ये लोग क्या खाएंगे? सरकार इन पर ध्यान क्यों नहीं देती? देश के प्रधानमंत्री यह कहते हैं कि उनके पास 6 लाख टन अनाज गोदामों में पड़ा है (सड रहा है) तो फिर इनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों होता है? इनके साथ यह व्यवहार वंशागत भेदभाव का नतीजा है।
मुखमरी से मरने वाले लोग मूलनिवासी हैं। जब देश आजाद हुआ था तो केवल 'गरीबी रेखा' थी. अब ब्राह्मणवादियों ने आजादी के बाद 'मुखमरी' नाम की नई रेखा निर्माणकी। ब्राह्मणवादी लोग मुखमरी से नहीं मर रहे हैं। उनके परिवारों के लिए खाने के लिए बहुत अनाज है, पीने के लिए पानी है, मकान है, अच्छी सुविधाएं हैं लेकिन हमारे लोगों के पास खाने के लिए ही कुछ नहीं है तो। बाकी सुविधाओं की बात तो बहुत ही दूर की है। शासन ब्राह्मणों के हाथों में है. प्रशासन ब्राहाणों के हाथों में है। अतः देश के 20 करोड़ 85 लाख से ज्यादा लोग भुखमरी के कगार पर खड़े होना इसका मूल कारण ब्राह्मणवाद है।
मूलनिवासी बहुजन समाज की हजारों समस्याएँ
मूलनिवासी बहुजनों की हजारों समस्याएं है। उन सभी समस्याओं को अभी तक अनेक फिताबों में लिखा गया है। इन पर प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से अखबारों में जानकारी भी दी गई है।
समस्याए हजारों हैं परंतू उनमें से कुछ छोटी से छोटी तथा कुछ बड़ी से
बड़ी समस्या को इस पुस्तक में आपके सामने पेश किया है। यह पुस्तक जनसाधारण तक पहुँचे और पढ़ते वक्त हमारे लोगों को कोई कठिनाई महसूस न हो इसके लिए किताब को संक्षिप्त रूप में ही रखने का निर्णय किया गया। ताकि हमारे लोग इसे पढ़े और समझ, समस्याओं को व्यापक दृष्टिकोण से देखें ताकि मूलनिवासी बहुजन समाज के प्रति ब्राह्मणवादियों की घिनौनी करतूतों की आपके मानस पटल पर स्पष्ट तस्वीर अंकित हो सके। मूलनिवासी बहुजन समाज के उत्थान में आप अपनी यथाशक्ति भूमिका निभा सकें।
इस किताब को पढ़कर हमारे लोग इस बात पर सोचेंगे कि हमारी समस्याओं का मूल कारण ब्राह्मणवाद है। समस्याएं हजारों हैं। जैसे देश में 3901 स्वास्थ्य केंद्र 22 हजार 989 उपस्वास्थ्य केंद्र तथा 3830 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की हर साल आवश्यकता है, केवल इतना ही नहीं बल्कि देश में स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं है।
देश के 60 करोड़ लोग इस सुविधा से वंचित है। अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के 98% लोग ऐसे हैं जिन्हें बिजली, पानी नसीब नहीं है। देश के 5 करोड़ 20 लाख लोग गंदी बस्तियों में रहने के लिए मजबूर हैं। वर्ष 2000 तक, 2274 प्राईमरी स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं था। 1 लाख 52 हजार 856 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक, 1 लाख 68 हजार 402 स्कूलों में चार, 29 हजार 979 स्कूलों में पाँच और मात्र 48 हजार 379 स्कूलों में पाँच से अधिक शिक्षक कार्यरत थे।
इनमें ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। यह समस्याएँ मूलनिवासी बहुजनों से संबंधित है। बंधूओं मजदूरों की समस्या से समाज पीड़ित है। समाज नेतृत्वहीन है, आदि हजारों समस्याएं है। इन समस्याओं की जड़ों को देखेंगे तो इनकी जड़ में ब्राह्मणवाद ही है यह बात किसी से छिपी नहीं है।
ब्राह्मणवाद का खात्मा जरूरी
आज हम देखते हैं कि मूलनिवासी बहुजन समाज की लाखों समस्याएं हैऔर सभी समस्याओं का मूल कारण ब्राह्मणवाद है क्योंकि ब्राह्मणवाद का मुख्य सार ही असमानता, घृणा एवं अन्याये है अर्थात ब्राह्मणवादी व्यवस्था असमानता पर आधारित है। यह व्यवस्था 'अल्पजन हिताय (विदेशी आर्य ब्राह्मण) अल्पजन सुखाय' पर आधारित है। जबकि भारत के मूलनिवासी बहुजनों की व्यवस्था 'बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय' पर आधारित थी।
इस प्रकार असमानता एवं अन्यायकारी ब्राह्मणवादी व्यवस्था को नष्ट किए बगैर मूलनिवासी बहुजन समाज को हक-अधिकार एवं मान-सम्मान-स्वाभिमान प्राप्त नहीं हो सकता। इसलिए सभी मूलनिवासी बहुजन समाज के लोगों को इस व्यवस्था को नष्ट करने के लिए तथा विदेशी आर्य ब्राह्मणों से मूलनिवासी बहुजन भारत को स्वतंत्र करने के लिए सर्वस्व समर्पण को तैयार रहना होगा। क्योंकि ब्राह्मणवादी व्यवस्था को नष्ट किए बगैर मूलनिवासी बहुजन समाज की लाखों समस्याओं को हल नहीं किया जा सकता इसलिए इस अन्याय, असमानताकारी व्यवस्था का खात्मा आवश्यक है।
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