Safar -e- Musafir (मैं बंदा नेक नहीं हूँ। )
**मैंने देखा है...
लोग शहर बदल लेते हैं,
रिश्ते बदल लेते हैं,
काम बदल लेते हैं।
बस एक चीज़ नहीं बदलती...
वो ख़ाली जगह,
जिसे हम किसी और से भरना चाहते हैं।
शायद कुछ जगहें
सिर्फ़ सफ़र ही भरता है।
— मुसाफ़िर**
Where is it happening?
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