Illegal Recovery
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पॉकेट फंडिंग कौन करता है और कौन करवाता है माइक्रो फाइनेंस में आज हम उसी के बारे में जानेंगे उससे पहले ये जानना जरुरी है कि पॉकेट फंडिंग होती क्या है आइये समझते है, जैसा कि हम सभी जानते है कि माइक्रो फाइनेंस का मुख्य धंधा होता है लोन वितरण करना और लोन को ब्याज सहित किश्तों में वसूली करना।
किश्त वसूली का कार्य मुख्य रूप से फिल्ड कर्मचारी लोग करते है लेकिन कलेक्शन 100% हो इसका प्रेसर सभी सीनियर के ऊपर रहता है जो जितना बड़ा सीनियर होता है उसके ऊपर उतना बड़ा प्रेसर होता है इस प्रेसर से बचने के लिये अपने जूनियर पर पागल कुत्ते की तरह सुबह से लेकर रात तक भौकता रहता है।
भौकने का सबसे बड़ा कारण यह भी है कि यदि कलेक्शन का बुरा हाल हो जायेगा तो उन सभी सुपरवाइजर का भी बुरा हाल हो जायेगा जो जितना बड़ा अधिकारी उसका नौकरी जाने का डर उतना ही बड़ा रहता है ऐसे सीनियर की नौकरी ना जाये इसलिये खूब चिल्लम-ची होती रहती है सुबह से लेकर साम तक।
आते है टॉपिक पर आखिर पॉकेट फंडिंग किस चिड़िया का नाम है फिल्ड स्टॉफ ज़ब किश्त वसूली के लिये फिल्ड में जाते है तो दो चार ऐसी कस्टमर मिलती है जो कस्टमर घर छोड़कर पलायन कर चुकी होती है घर में टाले टंगे होते है और कुछ ऐसी भी कस्टमर होती जिसकी घर की आर्थिक स्थिति बिगड चुकी होती है अत्यधिक कर्जभार या कुछ अन्य कारण भी हो सकते है।
ऐसे कस्टमर लोगों का कलेक्शन करने का भी प्रेसर बहुत ज्यादा रहता इसके लिये रात के 8-9 बजे तक भी फिल्ड में रहने के लिये बोला जाता है स्टॉफ को फिर भी कलेक्शन नहीं आया तो "सीनियर बोलते है कि मैनेज करो कैसे भी करना है करो मैं कुछ नहीं जानता" जबकि वो सब कुछ जानता है।
फिर स्टॉफ अपने पॉकेट से किश्त जमा करता है या किसी NPA कस्टमर का कलेक्शन न्यूज़ क्रिएट होने वाले OD कस्टमर के अकॉउंट में पोस्टिंग कर देता है सीनियर बोलेगा कि अपना वसूली कर लेना।
ये प्रोसेस कोई खुद की मर्जी से नहीं करता बल्कि ये काम फ़ोर्सफूली करवाया जाता है ऐसा करने से सभी सीनियर बड़ी राहत की सांस लेते है क्योंकि उनकी नौकरी सेफ हो जाती है लेकिन फिल्ड स्टॉफ की नौकरी खतरे में चली जाती है क्योंकि ऐसा करना किसी लीगल कानून में लिखा ही नहीं गया है।
"मैनेजर लोग पेटी कैश तक खा जाते हैं उनसे फंडिंग की उम्मीद मत रखो लेकिन जिस स्टाफ ने फंडिंग लगाने की मना कर दी तो उसकी नौकरी खा जाते हैं सभी सीनियर और HR मिलकर। इसलिए फंडिंग लगाने वाला जो वायरस वो बहुत ही खतरनाक रूप ले चुका है फील्ड स्टाफ की जितनी सैलरी आती है सब फंडिंग मे लगवा देते हैं फिर उधार कर्जा ले लेकर अपने खर्चे पूरे करने पड़ते हैं जिन्दगी नरक बना दी पॉकेट फंडिंग ने फील्ड स्टाफ की और जो स्टाफ फंडिंग लगा लगा कर ब्रांच की इज्जत बचाता रहता है उसका तो प्रमोशन तक रोक लेते हैं और अगर प्रमोशन हो भी रहा हो तो होने नहीं देते हैं क्युंकि वो फंडिंग लगाता रहता है इसलिए उसको बेबकूफ समझते रहते हैं।
विशेष अपील ________________
कोई भी ग्राहक को अगर एजेंट कहे अभी मे पेसा भर देता हु आप बाद मे दे देना"
ऐसा कभी भी ना करे,
अगर पैसा हे तो सीधा बैक को भरे"
किश्त वसूली का कार्य मुख्य रूप से फिल्ड कर्मचारी लोग करते है लेकिन कलेक्शन 100% हो इसका प्रेसर सभी सीनियर के ऊपर रहता है जो जितना बड़ा सीनियर होता है उसके ऊपर उतना बड़ा प्रेसर होता है इस प्रेसर से बचने के लिये अपने जूनियर पर पागल कुत्ते की तरह सुबह से लेकर रात तक भौकता रहता है।
भौकने का सबसे बड़ा कारण यह भी है कि यदि कलेक्शन का बुरा हाल हो जायेगा तो उन सभी सुपरवाइजर का भी बुरा हाल हो जायेगा जो जितना बड़ा अधिकारी उसका नौकरी जाने का डर उतना ही बड़ा रहता है ऐसे सीनियर की नौकरी ना जाये इसलिये खूब चिल्लम-ची होती रहती है सुबह से लेकर साम तक।
आते है टॉपिक पर आखिर पॉकेट फंडिंग किस चिड़िया का नाम है फिल्ड स्टॉफ ज़ब किश्त वसूली के लिये फिल्ड में जाते है तो दो चार ऐसी कस्टमर मिलती है जो कस्टमर घर छोड़कर पलायन कर चुकी होती है घर में टाले टंगे होते है और कुछ ऐसी भी कस्टमर होती जिसकी घर की आर्थिक स्थिति बिगड चुकी होती है अत्यधिक कर्जभार या कुछ अन्य कारण भी हो सकते है।
ऐसे कस्टमर लोगों का कलेक्शन करने का भी प्रेसर बहुत ज्यादा रहता इसके लिये रात के 8-9 बजे तक भी फिल्ड में रहने के लिये बोला जाता है स्टॉफ को फिर भी कलेक्शन नहीं आया तो "सीनियर बोलते है कि मैनेज करो कैसे भी करना है करो मैं कुछ नहीं जानता" जबकि वो सब कुछ जानता है।
फिर स्टॉफ अपने पॉकेट से किश्त जमा करता है या किसी NPA कस्टमर का कलेक्शन न्यूज़ क्रिएट होने वाले OD कस्टमर के अकॉउंट में पोस्टिंग कर देता है सीनियर बोलेगा कि अपना वसूली कर लेना।
ये प्रोसेस कोई खुद की मर्जी से नहीं करता बल्कि ये काम फ़ोर्सफूली करवाया जाता है ऐसा करने से सभी सीनियर बड़ी राहत की सांस लेते है क्योंकि उनकी नौकरी सेफ हो जाती है लेकिन फिल्ड स्टॉफ की नौकरी खतरे में चली जाती है क्योंकि ऐसा करना किसी लीगल कानून में लिखा ही नहीं गया है।
"मैनेजर लोग पेटी कैश तक खा जाते हैं उनसे फंडिंग की उम्मीद मत रखो लेकिन जिस स्टाफ ने फंडिंग लगाने की मना कर दी तो उसकी नौकरी खा जाते हैं सभी सीनियर और HR मिलकर। इसलिए फंडिंग लगाने वाला जो वायरस वो बहुत ही खतरनाक रूप ले चुका है फील्ड स्टाफ की जितनी सैलरी आती है सब फंडिंग मे लगवा देते हैं फिर उधार कर्जा ले लेकर अपने खर्चे पूरे करने पड़ते हैं जिन्दगी नरक बना दी पॉकेट फंडिंग ने फील्ड स्टाफ की और जो स्टाफ फंडिंग लगा लगा कर ब्रांच की इज्जत बचाता रहता है उसका तो प्रमोशन तक रोक लेते हैं और अगर प्रमोशन हो भी रहा हो तो होने नहीं देते हैं क्युंकि वो फंडिंग लगाता रहता है इसलिए उसको बेबकूफ समझते रहते हैं।
विशेष अपील ________________
कोई भी ग्राहक को अगर एजेंट कहे अभी मे पेसा भर देता हु आप बाद मे दे देना"
ऐसा कभी भी ना करे,
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