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होली के दिन दिल्ली में दो हत्याएं होती है और लखनऊ मे 2 मार्च 4 मार्च को भी दो हत्याए होती है वैसे पुरे देश मे और भी घटनाए हुई पर सब हाईलाइट नही है ।
पहली घटना दिल्ली उत्तम नगर में तरुण और मुस्लिम पड़ोसियों मे रंग विवाद को लेकर दोनो मे मारपीट होती है दोनो पक्षो के लोग घायल होते है और उसमे तरुण की मृत्यू हो जाती है।
दूसरी घटना दिल्ली पालम विहार से आती है जहां होली वाले दिन पुनीत यादव की मां आपस मे लड़ाई कर रहे दो हिन्दू गुट को बीच बचाव करके छुडा देती है जिससे एक गुट रात मे 10 लोगो के साथ उनके घर पर हमला कर देते और पुनीत के सीने मे चाकू मारकर हत्या कर देते है।
तीसरी घटना लखनऊ की है जहा सुरज गौतम एक लडकी शिवानी तिवारी को होली के दिन हैप्पी होली बोल देता है , जिससे उसके भाई और बहन ने चाकूओ से उसकी हत्या कर देते है दलित होकर ब्राह्मण को happy holi बोलेगा ।
चौथी घटना लखनऊ की एक 12 साल के मासूम बच्चे उनैज खान के सर के बीच मे गोली मारी गई बच्चे को पहले बर्थडे के नाम पर घर बुलाया गया फिर सर मे पिस्टल सटाकर गोली मार दी गई।
तरुण की हत्या के बाद मामला तुरंत धार्मिक रंग ले लेता है। क्योंकि आरोपी मुस्लिम समुदाय से आते थे । इसलिए भीड़ द्वारा उसके घर से सामान को निकालकर जला दिया जाता है। प्रशासन भी सक्रिय हो गया और बिना न्यायिक प्रक्रिया पूरी किये बुलडोजर भी चल जाता है।
पुनीत यादव को 8 से 10 लोगों की भीड़ मिलकर चाकूओ से मौत के घाट उतार दिया पर इस हत्या की दुसरे मोहल्ले वाले को पता नही चला ना और मिडिया भी शांत ना बुलडोजर की कार्रवाई हुई क्योंकि मारने वाले हिन्दू ही थे ना मिडिया को मिर्च मसाला मिलता ना राजनैतिक संघटन ना धार्मिक ठेकेदारो को ।
लखनऊ की दोनो घटनाओ को देख लो मारने वाले दोनो हिन्दू ब्राह्मण है कही कोई खबर नही उनैज खान को मारने वाला डिप्टी सीएम दिनेश का रिस्तेदार है ना कोई बुलडोजर चला ना यहा कोई हिन्दुओ के ठेकेदार पहुंचे ना किसी क घर मे आग लगाई गई। ।
अगर न्याय धर्म देखकर ही तय होगा तो इसका सबसे बड़ा नुक़सान बहुसंख्यक को है। कभी कॉपी-क़लम लेकर बैठना और रोज देश में होने वाली हत्याओं में मृतक और हत्यारा दोनों का धर्म लिखना उसके बाद कैलकुलेटर से कैलकुलेट करना की हिंदुओं की हत्या सबसे अधिक किसने किया है? फिर हत्यारों को मिलने वाली सजा को भी जानने की कोशिश करना।
जब हिंदुओं की हत्या में शामिल हिंदुओं को सजा नहीं मिलेगी तो नुक़सान मुसलमानों का नहीं बल्कि हिंदू परिवारों का है। इसलिए न्याय के तराज़ू का पलड़ा हमेशा बराबर होनी चाहिये। वरना नुक़सान बहुसंख्यक समुदाय को है।
और इन झगड़े और दंगे को गहन से जांच करना इनके पिछे धर्मो के कट्टर ठेकेदारो की सोच और हाथ मिलेगा चाहे हिन्दु हो या मुसलमान। 🙏
पहली घटना दिल्ली उत्तम नगर में तरुण और मुस्लिम पड़ोसियों मे रंग विवाद को लेकर दोनो मे मारपीट होती है दोनो पक्षो के लोग घायल होते है और उसमे तरुण की मृत्यू हो जाती है।
दूसरी घटना दिल्ली पालम विहार से आती है जहां होली वाले दिन पुनीत यादव की मां आपस मे लड़ाई कर रहे दो हिन्दू गुट को बीच बचाव करके छुडा देती है जिससे एक गुट रात मे 10 लोगो के साथ उनके घर पर हमला कर देते और पुनीत के सीने मे चाकू मारकर हत्या कर देते है।
तीसरी घटना लखनऊ की है जहा सुरज गौतम एक लडकी शिवानी तिवारी को होली के दिन हैप्पी होली बोल देता है , जिससे उसके भाई और बहन ने चाकूओ से उसकी हत्या कर देते है दलित होकर ब्राह्मण को happy holi बोलेगा ।
चौथी घटना लखनऊ की एक 12 साल के मासूम बच्चे उनैज खान के सर के बीच मे गोली मारी गई बच्चे को पहले बर्थडे के नाम पर घर बुलाया गया फिर सर मे पिस्टल सटाकर गोली मार दी गई।
तरुण की हत्या के बाद मामला तुरंत धार्मिक रंग ले लेता है। क्योंकि आरोपी मुस्लिम समुदाय से आते थे । इसलिए भीड़ द्वारा उसके घर से सामान को निकालकर जला दिया जाता है। प्रशासन भी सक्रिय हो गया और बिना न्यायिक प्रक्रिया पूरी किये बुलडोजर भी चल जाता है।
पुनीत यादव को 8 से 10 लोगों की भीड़ मिलकर चाकूओ से मौत के घाट उतार दिया पर इस हत्या की दुसरे मोहल्ले वाले को पता नही चला ना और मिडिया भी शांत ना बुलडोजर की कार्रवाई हुई क्योंकि मारने वाले हिन्दू ही थे ना मिडिया को मिर्च मसाला मिलता ना राजनैतिक संघटन ना धार्मिक ठेकेदारो को ।
लखनऊ की दोनो घटनाओ को देख लो मारने वाले दोनो हिन्दू ब्राह्मण है कही कोई खबर नही उनैज खान को मारने वाला डिप्टी सीएम दिनेश का रिस्तेदार है ना कोई बुलडोजर चला ना यहा कोई हिन्दुओ के ठेकेदार पहुंचे ना किसी क घर मे आग लगाई गई। ।
अगर न्याय धर्म देखकर ही तय होगा तो इसका सबसे बड़ा नुक़सान बहुसंख्यक को है। कभी कॉपी-क़लम लेकर बैठना और रोज देश में होने वाली हत्याओं में मृतक और हत्यारा दोनों का धर्म लिखना उसके बाद कैलकुलेटर से कैलकुलेट करना की हिंदुओं की हत्या सबसे अधिक किसने किया है? फिर हत्यारों को मिलने वाली सजा को भी जानने की कोशिश करना।
जब हिंदुओं की हत्या में शामिल हिंदुओं को सजा नहीं मिलेगी तो नुक़सान मुसलमानों का नहीं बल्कि हिंदू परिवारों का है। इसलिए न्याय के तराज़ू का पलड़ा हमेशा बराबर होनी चाहिये। वरना नुक़सान बहुसंख्यक समुदाय को है।
और इन झगड़े और दंगे को गहन से जांच करना इनके पिछे धर्मो के कट्टर ठेकेदारो की सोच और हाथ मिलेगा चाहे हिन्दु हो या मुसलमान। 🙏
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Uttam Nagar, delhi, Delhi,Delhi, India, New Delhi
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Host or PublisherPrince kumar 97






